अनवेषण
Thursday, 19 September 2013
Friday, 8 February 2013
सूरज की आखिरी किरण
आसमाँ का कहीं लाल ,कहीं गुलाबी
कहीं नीले ,तो कहीं पीले रंग की चादर ओढ़ लेना
अन्दर तक ठण्ड का एहसास जगाती
शीतल हवा का मस्ती में आवारा भटकना ।
बता रहे है इस जागते जहाँ को
कि शाम बस चंद पलों की मेह्मान है ।
इसी शाम की शीतल छांव में
परिंदे ,इंसान ,जानवर सब थके हारे
लौट पड़े है घर की तरफ ।
और देखते ही देखते कुछ ही पलों में
चाँद आसमां को ही नदी बना
हौले -हौले तैरने लगता है ।
और छा जाता है अँधेरा हर तरफ
घुल जाती है इन अंधेरों में खामोशियाँ
तो कभी खामोशियों में बाधा डालती
हवाओं की सरसराहट ।
ये चाँद, ये हवाये ,ये खामोशियाँ
बता रही हैं की रात आ गयी
और सुला गयी इस जागते जहाँ को
साथ में कितने सपने ,कितनी बातें
कितने वादे , कितनी तकरारे
कितने दर्द ,कितनी पीड़ा
सब को सुला देती है ये रात
आजाद कर देती है हमें
इनकी जकड़न से ।
और जगा जाती है
मन में कुछ मीठे - प्यारे सपने
अनमोल यादों के सुनहरे पल
कोई प्यारा देखा -अनदेखा चेहरा
और साथ में दे जाती है
एहसास एक ऐसी जिन्दगी का
जो हम हमेशा से जीना चाहते हैं ।
कितनी प्यारी, कितनी सुन्दर
कितनी अपनी होती है न, ये रात
कभी चांदनी तो कभी अँधेरी ये रात ।
आसमाँ का कहीं लाल ,कहीं गुलाबी
कहीं नीले ,तो कहीं पीले रंग की चादर ओढ़ लेना
अन्दर तक ठण्ड का एहसास जगाती
शीतल हवा का मस्ती में आवारा भटकना ।
बता रहे है इस जागते जहाँ को
कि शाम बस चंद पलों की मेह्मान है ।
इसी शाम की शीतल छांव में
परिंदे ,इंसान ,जानवर सब थके हारे
लौट पड़े है घर की तरफ ।
और देखते ही देखते कुछ ही पलों में
चाँद आसमां को ही नदी बना
हौले -हौले तैरने लगता है ।
और छा जाता है अँधेरा हर तरफ
घुल जाती है इन अंधेरों में खामोशियाँ
तो कभी खामोशियों में बाधा डालती
हवाओं की सरसराहट ।
ये चाँद, ये हवाये ,ये खामोशियाँ
बता रही हैं की रात आ गयी
और सुला गयी इस जागते जहाँ को
साथ में कितने सपने ,कितनी बातें
कितने वादे , कितनी तकरारे
कितने दर्द ,कितनी पीड़ा
सब को सुला देती है ये रात
आजाद कर देती है हमें
इनकी जकड़न से ।
और जगा जाती है
मन में कुछ मीठे - प्यारे सपने
अनमोल यादों के सुनहरे पल
कोई प्यारा देखा -अनदेखा चेहरा
और साथ में दे जाती है
एहसास एक ऐसी जिन्दगी का
जो हम हमेशा से जीना चाहते हैं ।
कितनी प्यारी, कितनी सुन्दर
कितनी अपनी होती है न, ये रात
कभी चांदनी तो कभी अँधेरी ये रात ।
Tuesday, 15 January 2013
Monday, 19 November 2012
छुपे हुए रहस्य
सदियों की दास्ताँ समेटे
बेमिसाल मगर मौन ये सागर
सबकुछ देखता आया है
कभी उठती कभी गिरती
फिर भी आगे बढती
कभी चट्टानों से लडती
अनंत , गहरे पानी में
अपना वजूद ढूढती
बलखाती लहरों को।
ऐसे ही रोज न जाने कितनी लहरे
अपना अस्तित्व पाती है
और पल में ही खो देती है
हमारी जिन्दगी की तरह ।
बेमिसाल मगर मौन ये सागर
सबकुछ देखता आया है
कभी उठती कभी गिरती
फिर भी आगे बढती
कभी चट्टानों से लडती
अनंत , गहरे पानी में
अपना वजूद ढूढती
बलखाती लहरों को।
ऐसे ही रोज न जाने कितनी लहरे
अपना अस्तित्व पाती है
और पल में ही खो देती है
हमारी जिन्दगी की तरह ।
Thursday, 13 September 2012
Tuesday, 7 August 2012
संघर्ष
सदियों की दास्ताँ समेटे
बेमिसाल मगर मौन ये सागर
सबकुछ देखता आया है
कभी उठती कभी गिरती
फिर भी आगे बढती
कभी चट्टानों से लडती
अनंत , गहरे पानी में
अपना वजूद ढूढती
खुद के ही आगोश में समाती
बलखाती लहरों को।
ऐसे ही रोज न जाने कितनी लहरे
अपना अस्तित्व पाती है
और पल में ही खो देती है
हमारी जिन्दगी की तरह ।
बेमिसाल मगर मौन ये सागर
सबकुछ देखता आया है
कभी उठती कभी गिरती
फिर भी आगे बढती
कभी चट्टानों से लडती
अनंत , गहरे पानी में
अपना वजूद ढूढती
खुद के ही आगोश में समाती
बलखाती लहरों को।
ऐसे ही रोज न जाने कितनी लहरे
अपना अस्तित्व पाती है
और पल में ही खो देती है
हमारी जिन्दगी की तरह ।
Saturday, 21 July 2012
तुझे पाना है ये सारा जहाँ
तुझे जीतना है सारा आसमाँ ।
लडखडाये क्या कदम तू गिर गया
अँधेरा घना था तू उसमे घिर गया
उठ जरा ,निकल इन अंधेरों से
अपनी हिम्मत पर यकीन कर
बढा दे फिर से रुके कदम
कि तुझे पाना है ये सारा जहाँ
तुझे जीतना है सारा आसमाँ ।
आधा सफ़र हुआ तू खो गया
जाने किसके सपनों में तू सो गया
खोल आँखे ,फिर से आ होश में
दिल मे रख हौसला जीत का
शुरू कर दे फिर अधूरा सफ़र
कि तुझे पाना है ये सारा जहाँ
तुझे जीतना है सारा आसमाँ ।
मंजिल करीब आई तू रुक गया
रिश्तों के आगे तू झुक गया
तोड़ बंधन ,अपने पर कर भरोसा
रिश्तों की दुनिया से आगे बढ़
कि तुझे पाना है ये सारा जहाँ
तुझे जीतना है सारा आसमाँ ।
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