Saturday, 30 June 2012

डरता हूँ तुम्हारे आसमां से जमीन पर आने से
कही ख़तम न हो जाये अँधेरा मेरे गरीबखाने से।
डर लगता है जब खड़ी  होती हो आईने के सामने
कोई कोई चोर चुरा न ले तस्वीर  तेरी आईने  से।
निकला न करो यू इन अँधेरी रातों में संवरकर
कही हो न जाये सवेरा तेरे रूप के खजाने से ।
छुपा लो चाँद से चेहरे को अपनी रेशमी जुल्फों से
कहीं हो न जाये खता मुझसे ,तुम्हारे पास आने से ।
न हसों इतनी तेज की आवाज पहुँच जाये बादलों तक
कहीं होने न लगे बारिश, तेरे यू  मुस्कराने से  ।

Friday, 29 June 2012

बड़े दिनों बाद  मेरे बागों में कली मुस्काई है 
जरुर वो आज  खिलखिला  के हँसी  होगी ।
रात के अंधेरों में चमकने लगी  है दुनिया
आज वह आँगन में निकल आई  होगी ।
बिन  हवा शाखों के  पत्ते  झूमने   लगे
आज  वह  मस्ती  में   इतराई   होगी  ।
बेचैनी में लहरें कभी उठने तो कभी गिरने लगी
आज उसे किसी अपने की याद आई होगी । 

Wednesday, 27 June 2012

my first poem at CIC.........................

एक खूबसूरत  सा आलम देखने को  जी चाहता है ।
आज फिर गाँव लौट जाने को जी  चाहता है ।
मखमली घास और उन पर ओस की   बूंदें
सूरज की मद्धिम रोशनी और चमचमाती  ये बूंदें
इन्हें हाथों  में ले  चूमने  को  जी  चाहता है
आज फिर गाँव लौट जाने को जी  चाहता है ।
झूमती बलखाती वो सरसों की बलियां
उन पर खिलते नाजुक फूलों की कलियाँ
उन्हें बाहों में ले संग झूमने को जी चाहता है
आज फिर गाँव लौट जाने को जी  चाहता है ।

Friday, 22 June 2012

हसरतें

अभी  न पूछो हमसे , क्या है दिल  में हमारे
अभी बहुत सी हसरते छिपी   है  यहाँ
 आसमां तो बहुत पास  है  हमारे
चाँद तारों से आगे बनानी है दुनिया  ।
न कोई लड़ाई, न कोई झगडा यहाँ 
 न किसी  से गिला न शिकवा होगा
दिलों  में खिलेंगी  मोहब्बत की कलियाँ
प्यार ही  प्यार बरसेगा चारो तरफ
कहलाएगी वो इंसानों की दुनिया
बनायेंगे हम वहां   ऐसा आशियाँ  ।
 न कोई  छोटा न कोई होगा  बड़ा
न कोई अकेला , न कोई होगा पराया
रात   में निडर होकर  नाचेंगी परियां
खुशियाँ ही खुशियाँ होंगी चारो  तरफ
बहुत खुबसूरत होगी वो हमारी दुनिया
बहुत सुन्दर होगा वो हमारा आशियाँ ।



Thursday, 21 June 2012

                                          जब सुबह  अधखिली धूप में आपकी याद आये
                                           तुम्हारी ये खिलती मुस्कान मेरे मन को हंसा जाये । 
                                          जब दोपहर की बढती तमाजत में मेरा दिल न लगे
                                          हवा का गर्म झोका मेरे तन को तेरा अहसास दिला जाये ।
                                           जब शाम की चुभती ख़ामोशी मुझे तडपाने लगे
                                         चुपके से आपकी आवाज आये और बदन को गुदगुदा जाये ।
                                          जब अकेले तनहा  चांदनी रातों में मुझे नींद न आये
                                          काश कोई मेरे सपनो में आकर मुझे आहिस्ते   से सुला जाये ।

Tuesday, 19 June 2012


आज फलक पर चाँद पूरा निकला तो पूर्णिमा  की याद  आई ।
 आज फिर गाँव  का पीपल चांदनी में  नहाया तो पूर्णिमा  की याद आई।
इंतजार करते  दीपक बुझ से गए थे अंधेरो  में डूबे थे आशियाने 
आज रात  सूने  आँगन को चमकते देखा तो  पूर्णिमा  की याद आई।
 वादियों की खामोशियाँ हवाओ का बिना आवाज किये गुजर जाना
आज परियो की झंकार से  वादियों को झूमते देखा तो पूर्णिमा की याद आई।
 सुबह से चमकता सूरज था और शाम  का सुहाना मौसम 
मगर आधी  रात  होने को आई और  चाँद न निकला तो पूर्णिमा की याद  आई ।

Friday, 15 June 2012

जिन्दगी में इतने सवाल खड़े क्यों  हो गए?
आज हम  इतने बड़े  क्यों  हो गए ?
न रिश्तों के  टूटने का डर  था
न किसी के रूठने का गम था
न कोई अपना, न ही पराया था
अब कितने ही रिश्ते है यहाँ
रोज कोई न कोई रूठ  जाता है यहाँ 
कुछ अपने कुछ पराये क्यों  हो गए
 हम   इतने बड़े  क्यों हो  गए ?
जब मन चाहा  रो लेते थे
जब जी चाहा  हंस लेते  थे
अपनी ही दुनिया,अपनी कहानी थी
अब दूसरों की बातो पर हँसते  है
किसी और के रोने पर रोते है
वो अपने खुशिया,अपनेआंसू कहाँ  खो गए
 आज हम  इतने बड़े क्यों  हो गए ?
आँखों  में चाँद-तारों के सपने  थे
 मन में आकाश छूने की तमन्ना 
अपने ही ख्वाब अपनी ही कहानी  थी
अब सपने मिट   गए आँखो से
तमन्ना,तमन्ना बन के ही रह गयी
 वो कहानी वो  ख्वाब क्यों  खो गए
आज हम  इतने बड़े क्यों  हो गए ?



Thursday, 14 June 2012

मेरे हाथों पर अपना हाथ रख तुमने वादा किया था ।
जिन्दगी भर साथ निभाने का तुमने वादा  किया था ।
चन्द यार क्या हुए , कि  तुम हमें भुला  बैठे 
मुझे  अपने सबसे करीब  रखने का तुमने वादा  किया था ।
बड़े शान -ए -शौकत से जाकर बस गए महलो में
कि तुमने साथ-साथ झोपड़े में रहने का  वादा  किया था ।
हसीं आ जाती है कभी मुझे उन मीठी -मीठी बातों पर 
जब हर वादे को निभाने का तुमने  वादा  किया था ।
तुम किसी भी राह पर जाओ ,मै साथ चलता रहूँगा
मैंने भी हर मोड़ पर साथ निभाने का वादा किया था ।

Tuesday, 12 June 2012

आज  का मौसम बहुत सुहावना था । सुबह से ही बारिश  की फुहारें धरती को नहलाने का प्रयास कर रही थी ।सूरज कभी निकलता तो कभी रूठकर  न जाने कहाँ गायब हो जाता ।हवाओं में पंछियों की मीठी -मीठी आवाजो के घुल -मिल जाने से आस -पास का वातावरण संगीतमय हो गया था ।अचानक मेरे मुह से निकल गया कि "काश ये पल यहीं रुक जाए ।"
लेकिन ये समय ही तो है जो हमारे अनुसार नही चलता ।वह अपनी अविचल गति से आगे बढता रहता है ,बिना किसी की परवाह किये ।
दोपहर हुई ।फिर देखते ही देखते शाम हो गयी ।और एक बार फिर मौसम ने करवट बदली ।धरती को चमकाने वाला सूरज न जाने कहाँ गायब हो गया ।नीले सुनहरे आसमान को डरावने काले बादलों ने ढक लिया ।तेज हवाएं चलने लगी ।और मूसलाधार बारिश शुरू हो गयी ।तेज हवाएं आंधी में बदल  गयी ।और सुबह का सुहावना मौसम तूफानी मौसम में तब्दील हो गया ।अकस्मात् मेरे दिल ने कहा "काश ये पल जितनी जल्दी हो सके गुजर जाये और फिर लौटकर कभी न आये ।"
अब जरा कुछ  पल रुक कर अपनी  जिन्दगी के बारे में सोचिये ।क्या हमारी जिन्दगी बदलते मौसम सी नहीं है ।कभी -कभी हमें अपने आस -पास के लोग ,वातावरण सब इतना अच्छा लगने लगता है कि हम सोचने लगते हैं कि वक्त यही ठहर जाये और जिन्दगी ऐसे ही हँसते -खेलते गुजर जाये ।लेकिन कभी -कभी हमारी जिन्दगी में कुछ पल ऐसे भी आते है जो हमें दुःख ,पीड़ा ,उदासी से भर जाते हैं और हमें ये कहने को मजबूर कर देते हैं की काश ये पल फिर कभी वापस न आये  ।हम उस पल को अपनी जिन्दगी की किताब से हमेशा के लिए मिटा देना  चाहते हैं ।लेकिन क्या हम सफल हो पाते हैं ?शायद नहीं ।तो क्यों न हम इस बात को स्वीकार कर लें  कि परिवर्तन संसार का नियम है ।ये दुख ,उदासी आंसू ,खुशी, प्यार  सब आपस में एक दूसरे से जुड़े हुए हैं ।अगर जिन्दगी का लुफ्त उठाना है तो हमें इन सब को साथ लेकर ख़ुशी -ख़ुशी जीना होगा ।
                              किसी के लिए रोना   सजा होता है
                              किसी के लिए हँसना  सजा होता है ।
                              कभी   प्यार  के  मौसम  में
                             किसी को प्यार करना  सजा होता है ।
                            लेकिन यकीन मानिये , हर सजा के पीछे 
                            जिन्दगी का अपना ही  मजा होता है ।

सुबह सूरज की पहली किरण से लेकर शाम के ढलते सूरज की आखिरी किरण तक हमारी जिन्दगी इतनी व्यस्त रहती है की हमें अपने बारे में सोचने का वक़्त ही नहीं मिलता ।ऐसे लगता है जैसे हम जिन्दगी को नहीं जिन्दगी हमें चला रही होती है ।काम ,काम और बस काम ।शाम को थक -हार कर हम घर आते है।रात आने पर हम छत  पर चले जाते है और एकदम अकेले हो जाना चाहते है ।सारी दुनिया से बेखबर ।हम चुपचाप आँख बंद कर लेट जाते है।रात की चांदनी हमें अपने आँचल में ढक लेती है ।चाँद सारी दुनिया को निहारता और अपनी प्रियवर को खोजता आगे बढता रहता है ।तभी  रात की  शीतल  हवा हमारे बदन को छूकर  किसी का एहसास दिला जाती है ।जो हमारे दिल के सबसे करीब  होता है ।और हम उसके सपनो में खोते चले जाते है।और यही से शुरू  होती है पिछली रात की अधूरी  कहानी जो कल रात अधूरी रह गयी थी ।हम उसे अपने पास महसूस करने लगते है, उससे बाते करने लगते है ,वादे  करते है और सुनहरे भविष्य के सपने देखने लगतेहै।  और एक दुसरे में खोते चले जाते हैऔर इसी कसमकस में कब नींद हमें अपने आगोश में समेट लेती है  पता  ही नहीं चलता ।
ऐसे  आलम में बस यही कहने को जी चाहता  है -
रातो का सफ़र अब जारी  हुआ, कोई नहीं है हम-दम मेरा 
तुम बन के मेरी हमसफ़र ,अब तुम मेरे साथ चलो ।
तारे तुझको देख रहे है ,अभी चाँद भी तुझको छेड़ेगा 
छुप कर मेरे सीने में अब तुम मेरे साथ चलो ।
 कुछ वादे किये थे  मिलकर हमने, देखे थे कुछ सपने हमने
पूरा करने उन सपनो वादों को अब तुम मेरे साथ चलो ।
दिन के उजालो में गर हम निकले, देखेगी दुनिया चोर नजर से 
हो के निडर रात की सुन्दर आभा में, अब तुम मेरे साथ चलो ।
रहेंगे जब तक चाँद सितारे कभी ख़तम न होगा अपना सफ़र 
भूल के तुम ये दुनिया सारी अब तुम मेरे साथ चलो ।