Saturday, 21 July 2012


तुझे पाना  है  ये सारा  जहाँ
तुझे जीतना है  सारा आसमाँ ।
लडखडाये क्या कदम तू  गिर गया 
अँधेरा घना था तू उसमे घिर  गया
उठ  जरा ,निकल इन अंधेरों से
अपनी हिम्मत पर यकीन  कर
बढा  दे फिर से रुके कदम
कि तुझे पाना  है  ये सारा  जहाँ
तुझे जीतना है सारा  आसमाँ ।
आधा सफ़र  हुआ  तू   खो  गया
जाने किसके सपनों में तू सो गया 
खोल आँखे ,फिर से आ होश  में
दिल मे रख हौसला जीत का
शुरू कर दे फिर अधूरा सफ़र
कि तुझे पाना  है  ये सारा  जहाँ
तुझे जीतना है सारा  आसमाँ ।
मंजिल करीब आई तू रुक गया
रिश्तों  के आगे तू झुक गया
तोड़ बंधन ,अपने पर कर  भरोसा 
रिश्तों  की दुनिया से आगे बढ़ 
कि तुझे पाना  है  ये सारा  जहाँ
तुझे जीतना है सारा  आसमाँ ।