जिन्दगी में इतने सवाल खड़े क्यों हो गए?
आज हम इतने बड़े क्यों हो गए ?
न रिश्तों के टूटने का डर था
न किसी के रूठने का गम था
न कोई अपना, न ही पराया था
अब कितने ही रिश्ते है यहाँ
रोज कोई न कोई रूठ जाता है यहाँ
कुछ अपने कुछ पराये क्यों हो गए
हम इतने बड़े क्यों हो गए ?
जब मन चाहा रो लेते थे
जब जी चाहा हंस लेते थे
अपनी ही दुनिया,अपनी कहानी थी
अब दूसरों की बातो पर हँसते है
किसी और के रोने पर रोते है
वो अपने खुशिया,अपनेआंसू कहाँ खो गए
आज हम इतने बड़े क्यों हो गए ?
आँखों में चाँद-तारों के सपने थे
मन में आकाश छूने की तमन्ना
अपने ही ख्वाब अपनी ही कहानी थी
अब सपने मिट गए आँखो से
तमन्ना,तमन्ना बन के ही रह गयी
वो कहानी वो ख्वाब क्यों खो गए
आज हम इतने बड़े क्यों हो गए ?
आज हम इतने बड़े क्यों हो गए ?
न रिश्तों के टूटने का डर था
न किसी के रूठने का गम था
न कोई अपना, न ही पराया था
अब कितने ही रिश्ते है यहाँ
रोज कोई न कोई रूठ जाता है यहाँ
कुछ अपने कुछ पराये क्यों हो गए
हम इतने बड़े क्यों हो गए ?
जब मन चाहा रो लेते थे
जब जी चाहा हंस लेते थे
अपनी ही दुनिया,अपनी कहानी थी
अब दूसरों की बातो पर हँसते है
किसी और के रोने पर रोते है
वो अपने खुशिया,अपनेआंसू कहाँ खो गए
आज हम इतने बड़े क्यों हो गए ?
आँखों में चाँद-तारों के सपने थे
मन में आकाश छूने की तमन्ना
अपने ही ख्वाब अपनी ही कहानी थी
अब सपने मिट गए आँखो से
तमन्ना,तमन्ना बन के ही रह गयी
वो कहानी वो ख्वाब क्यों खो गए
आज हम इतने बड़े क्यों हो गए ?