बड़े दिनों बाद मेरे बागों में कली मुस्काई है
जरुर वो आज खिलखिला के हँसी होगी ।
रात के अंधेरों में चमकने लगी है दुनिया
आज वह आँगन में निकल आई होगी ।
बिन हवा शाखों के पत्ते झूमने लगे
आज वह मस्ती में इतराई होगी ।
बेचैनी में लहरें कभी उठने तो कभी गिरने लगी
आज उसे किसी अपने की याद आई होगी ।
जरुर वो आज खिलखिला के हँसी होगी ।
रात के अंधेरों में चमकने लगी है दुनिया
आज वह आँगन में निकल आई होगी ।
बिन हवा शाखों के पत्ते झूमने लगे
आज वह मस्ती में इतराई होगी ।
बेचैनी में लहरें कभी उठने तो कभी गिरने लगी
आज उसे किसी अपने की याद आई होगी ।