Tuesday, 12 June 2012

आज  का मौसम बहुत सुहावना था । सुबह से ही बारिश  की फुहारें धरती को नहलाने का प्रयास कर रही थी ।सूरज कभी निकलता तो कभी रूठकर  न जाने कहाँ गायब हो जाता ।हवाओं में पंछियों की मीठी -मीठी आवाजो के घुल -मिल जाने से आस -पास का वातावरण संगीतमय हो गया था ।अचानक मेरे मुह से निकल गया कि "काश ये पल यहीं रुक जाए ।"
लेकिन ये समय ही तो है जो हमारे अनुसार नही चलता ।वह अपनी अविचल गति से आगे बढता रहता है ,बिना किसी की परवाह किये ।
दोपहर हुई ।फिर देखते ही देखते शाम हो गयी ।और एक बार फिर मौसम ने करवट बदली ।धरती को चमकाने वाला सूरज न जाने कहाँ गायब हो गया ।नीले सुनहरे आसमान को डरावने काले बादलों ने ढक लिया ।तेज हवाएं चलने लगी ।और मूसलाधार बारिश शुरू हो गयी ।तेज हवाएं आंधी में बदल  गयी ।और सुबह का सुहावना मौसम तूफानी मौसम में तब्दील हो गया ।अकस्मात् मेरे दिल ने कहा "काश ये पल जितनी जल्दी हो सके गुजर जाये और फिर लौटकर कभी न आये ।"
अब जरा कुछ  पल रुक कर अपनी  जिन्दगी के बारे में सोचिये ।क्या हमारी जिन्दगी बदलते मौसम सी नहीं है ।कभी -कभी हमें अपने आस -पास के लोग ,वातावरण सब इतना अच्छा लगने लगता है कि हम सोचने लगते हैं कि वक्त यही ठहर जाये और जिन्दगी ऐसे ही हँसते -खेलते गुजर जाये ।लेकिन कभी -कभी हमारी जिन्दगी में कुछ पल ऐसे भी आते है जो हमें दुःख ,पीड़ा ,उदासी से भर जाते हैं और हमें ये कहने को मजबूर कर देते हैं की काश ये पल फिर कभी वापस न आये  ।हम उस पल को अपनी जिन्दगी की किताब से हमेशा के लिए मिटा देना  चाहते हैं ।लेकिन क्या हम सफल हो पाते हैं ?शायद नहीं ।तो क्यों न हम इस बात को स्वीकार कर लें  कि परिवर्तन संसार का नियम है ।ये दुख ,उदासी आंसू ,खुशी, प्यार  सब आपस में एक दूसरे से जुड़े हुए हैं ।अगर जिन्दगी का लुफ्त उठाना है तो हमें इन सब को साथ लेकर ख़ुशी -ख़ुशी जीना होगा ।
                              किसी के लिए रोना   सजा होता है
                              किसी के लिए हँसना  सजा होता है ।
                              कभी   प्यार  के  मौसम  में
                             किसी को प्यार करना  सजा होता है ।
                            लेकिन यकीन मानिये , हर सजा के पीछे 
                            जिन्दगी का अपना ही  मजा होता है ।