Sunday, 8 July 2012

मेरे दिल को बहुत तडपाती है यादें
आँखों को वक्त-बे वक्त बरसाती है यादें ।
अब तो घर से निकलना भी गुनाह लगता है
राह चलते  वक्त भी सताती  है  यादें ।
कोई है इस जहाँ में,जिसे हम कह सके अपना 
वक्त आने पर यह अहसास दिलाती है यादें ।
अब तो  चाँद सूरज  की जरुरत लगती ही नहीं
 अँधेरे  में रोशनी बन साथ निभाती है यादें ।
दिन में साया बन पीछे पड़ी रहती है वो बातें
बीती बातों की याद दिला रात भर जगाती  है यादें ।